मुट्ठी दुआओं की माता -पिता ने चुपके से सिर पर छोड़ दी,"खुश रहो" कहकर..,
और हम नासमझ,जिंदगी भर मुकद्दर का एहसान मानते रहे..!
रंग बिरंगे मनके जड़ी राखियाँ सजी छोटी बड़ी समेटे धागे में स्नेह अपार आया राखी का त्योहार
🌹🌹सुप्रभात 🌹🌹
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