गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें, यूं ही मुसाफिरों की तरह ।
यादें वहीं खडी रह जाती हैं, रूके रास्तों की तरह ।
एक "उम्र" के बाद "उस उम्र" की बातें, "उम्र भर" याद आती हैं ।
पर "वह उम्र" फिर "उम्र भर" नहीं आती ।
🙂🙂🙂
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